Faiz Ahmed Faiz – Tujhe pukaara hai beirada
तुझे पुकारा है बेइरादा
तुझे पुकारा है बेइरादा
जो दिल दुखा है बहुत ज़ियादा
नदीम हो तेरा हरफ़े-शीरीं
तो रंग पर आये रंगे-बादा
अता करो इक अदा-ए-देरीं
तो अश्क से तर करें लबादा
न जाने किस दिन से मुंतज़िर है
दिले-सरे-रहगुज़र फ़तादा
कि एक दिन फिर नज़र में आये
वो बाम रौशन वो दर कुशादा
वो आये पुरसिश को, फिर सजाये
कबा-ए-रंगीं अदा-ए-सादा
(नदीम=दोस्त, फ़तादा=रासते
पर पड़ा दिल, पुरसिश=हाल चाल
पूछने को, कबा=कपड़े)