Hindi Poetry

Faiz Ahmed Faiz – Yeh kis khalish ne fir iss dil mein aashiyaana kiya


य’ किस ख़लिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया

य’ किस ख़लिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया
फिर आज किसने सुख़न हमसे ग़ायबाना किया

ग़मे-जहां हो, रुख़े-यार हो, कि दस्ते-उदू
सलूक जिससे किया हमने आशिकाना किया

थे ख़ाके-राह भी हम लोग, कहरे-तूफ़ां भी
सहा तो क्या न सहा, और किया तो क्या न किया

खुशा कि आज हरइक मुद्दई के लब पर है
वो राज़, जिसने हमें रांदए-ज़माना किया

वो हीलागर जो वफ़ाज़ू भी है, ज़फ़ाख़ू भी
किया भी ‘फ़ैज़’ तो किस बुत से दोस्ताना किया

(दस्ते-उदू=दुश्मन का हाथ, खुशा=ख़ुशी की बात,
रांदए-ज़माना=ज़माने से बाहर निकाला, हीलागर=
बहानेसाज़, ज़फ़ाख़ू=निरदई)