Gulzar – Chap chap chaiyi
छई छप छई, छपाक छई पानिओं पे छींटे उड़ाती हुई लड़की
देखी है हम ने
आती हुई लहरों पे जाती हुई लड़की
छयी छप छई, छपाक छई
कभी-कभी बातें तेरी अच्छी लगती हैं
फिर से कहना
आती हुई लहरों पे जाती हुई लड़की
ढूंढा करेंगे तुम्हें साहिलों पे हम
रेत पे ये पैरों की मोहरें न छोड़ना
सारा दिन लेटे-लेटे सोचेगा समन्दर
आते-जाते लोगों से पूछेगा समन्दर
साहिब रुकिए ज़रा
अरे देखी किसी ने
आती हुई लहरों पे जाती हुई लड़की
छयी छप छई, छपाक छई
कभी-कभी बातें तेरी अच्छी लगती हैं
छयी छप छई, छपाक छई
लिखते रहे हैं तुम्हें रोज़ ही
मगर ख़्वाहिशों के ख़त कभी भेजे ही नहीं
ऐनक लगा के कभी पढ़ना वो चिट्ठियां
आँखों के पानी में रखना वो चिट्ठियां
तैरती नज़र आएंगी जनाब
गोते खाती, आती हुई लहरों पे जाती हुई लड़की