Hindi Poetry

Gulzar – Monsoon


मॉनसून

कार का इंजन बंद कर के
और शीशे चढ़ा कर बारिश में
घने-घने पेड़ों से ढकी सेंट पॉल रोड़ पर
आंखें मीच के बैठे रहो और कार की छत पर
ताल सुनो तब बारिश की !
गीले बदन कुछ हवा के झोंके
पेड़ों की शाखों पर चलते दिखते हैं
शीशे पे फिसलते पानी की तहरीर में उंगलियां चलती हैं
कुछ खत, कुछ सतरें याद आती हैं
मॉनसून की सिम्फनी में !!…….