Hindi Poetry Gulzar – Sehma sehma dara sa rehta hai March 30, 2020 rhymecloud सहमा सहमा डरा सा रहता है सहमा सहमा डरा सा रहता है जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है काई सी जम गई है आँखों पर सारा मंज़र हरा सा रहता है एक पल देख लूँ तो उठता हूँ जल गया घर ज़रा सा रहता है सर में जुम्बिश ख़याल की भी नहीं ज़ानुओं पर धरा सा रहता है