Hindi Poetry Gulzar – Sona December 18, 2020 rhymecloud सोना ज़रा आवाज़ का लहजा तो बदलो……… ज़रा मद्धिम करो इस आंच को ‘सोना’ कि जल जाते हैं कंगुरे नर्म रिश्तों के ! ज़रा अलफ़ाज़ के नाख़ुन तराशो , बहुत चुभते हैं जब नाराज़गी से बात करती हो !!