Hindi Poetry

Javed Akhtar – Aao aur na socho


आओ
और ना सोचो
सोच के क्या पाओगे
जितना भी समझे हो
उतना पछताए हो
जितना भी समझोगे
उतना पछताओगे
आओ
और ना सोचो
सोच के क्या पाओगे

तुम एहसास की जिस मंज़िल पर अब पहुंचे हो
वो मेरी देखी- भाली है
जाने भी दो
इसका कब तक सोग मानना
ये दुनिया
अंदर से इतनी क्यूँ काली है
आओ
कुछ अब जीने का सामान करें हम
सच के हाथों
हमने जो मुश्किल पायी है
झूठ के हाथों
वो मुश्किल आसान करें हम
तुम मेरी आखों में आँखें डालके देखो
फिर मैं तुमसे
सारी झूठी कसमे खाऊँ
फिर तुम वो सारी झूठी बातें दोहराओ
जो सबको अच्छी लगती हैं
जैसे
वफ़ा करने की बातें
जीने की मरने की बातें
हम दोनों
यूं वकत गुज़ारें
मैं तुमको कुछ ख़्वाब दिखाऊँ
तुम मुझको कुछ ख़्वाब दिखाओ
जिनकी
कोई ताबीर नहीं हो
जितने दिन ये मेल रहेगा
देखो अच्छा खेल रहेगा
और
कभी दिल भर जाए तो
कह देना तुम
बीत गया मिलने का मौसम
आओ
और ना सोचो
सोच के क्या पाओगे