Hindi Poetry

Javed Akhtar – Dil ka har dard kho gya jaise


दिल का हर दर्द खो गया जैसे
मैं तो पत्थर का हो गया जैसे

दाग बाक़ी नहीं कि नक़्श कहूँ
कोई दीवार धो गया जैसे

जागता ज़हन ग़म की धूप में था
छाँव पाते ही सो गया जैसे

देखनेवाला था कल उस का तपाक
फिर से वो ग़ैर हो गया जैसे

कुछ बिछड़ने के भी तरीक़े हैं
ख़ैर, जाने दो जो गया जैसे