Javed Akhtar – Mai khuD se bhi yeh kehta hoon
मैं ख़ुद भी कब ये कहता हूँ कोई सबब नहीं
तू सच है मुझको छोड़ भी दे तो अजब नहीं
वापस जो चाहो जाना तो जा सकते हो मगर
अब इतनी दूर आ गए हम, देखो अब नहीं
ज़र का, ज़रूरतों का, ज़माने का, दोस्तो
करते तो हम भी हैं मगर इतना अदब नहीं
मेरा ख़ुलूस है तो हमेशा के वास्ते
तेरा करम नहीं है कि अब है और अब नहीं
आए वो रोज़ो-शब कि जो चाहे थे रोज़ो-शब
तो मेरे रोज़ो-शब भी मिरे रोज़ो-शब नहीं
दुनिया से क्या शिकायतें,लोगों से क्या गिला
हमको ही ज़िंदगी से निभाने का ढब नहीं