Hindi Poetry

Javed Akhtar – Aap bhi aaiye humko bh bulaate rahiye


आप भी आइए हमको भी बुलाते रहिए
दोस्तीआ ज़ुर्म नहीं दोस्त बनाते रहिए।

ज़हर पी जाइए और बाँटिए अमृत सबको
ज़ख्मप भी खाइए और गीत भी गाते रहिए।

वक्तम ने लूट लीं लोगों की तमन्नातएँ भी,
ख़्वाब जो देखिए औरों को दिखाते रहिए।

शक्ला तो आपके भी ज़हन में होगी कोई,
कभी बन जाएगी तसवीर बनाते रहिए।