Javed Akhtar – Meri zindagi meri manzilein
मिरी ज़िन्दगी मिरी मंज़िलें मुझे क़ुर्ब में नहीं, दूर दे
मुझे तू दिखा वही रास्ता, जो सफ़र के बाद ग़ुरूर दे
वही जज़्बा दे जो शहीद हो, हो खुशी तो जैसे कि ईद हो
कभी ग़म मिले तो बला का हो, मुझे वो भी एक सुरूर दे
तू गलत न समझे तो मैं कहूं, तिरा शुक्रिया कि दिया सुकूं
जो बढ़े तो बढ़ के बने जुनूं, मुझे वो ख़लिश भी ज़रूर दे
मुझे तूने की है अता ज़बां, मुझे ग़म सुनाने का ग़म कहां
रहे अनकही मिरी दास्तां, मुझे नुत्क़ पर वो उबूर दे
ये जो ज़ुल्फ़ तेरी उलझ गई, वो जो थी कभी तिरी धज गई
मैं तुझे सवारूंगा ज़िन्दगी, मिरे हाथ में ये उमूर दे