Hindi Poetry Ramdhari Singh Dinkar – Bhiayo aur behno August 5, 2025 rhymecloud भाइयो और बहनो लो शोणित, कुछ नहीं अगर यह आंसू और पसीना! सपने ही जब धधक उठें तब धरती पर क्या जीना? सुखी रहो, दे सका नहीं मैं जो-कुछ रो-समझाकर, मिले कभी वह तुम्हें भाइयो- बहनों! मुझे गंवाकर!