Hindi Poetry Ramdhari Singh Dinkar – Jheel August 26, 2025 rhymecloud झील मत छुओ इस झील को। कंकड़ी मारो नहीं, पत्तियाँ डारो नहीं, फूल मत बोरो। और कागज की तरी इसमें नहीं छोड़ो। खेल में तुमको पुलक-उन्मेष होता है, लहर बनने में सलिल को क्लेश होता है।