Ramdhari Singh Dinkar – Pariyon ka geet 1


परियों का गीत-1

हम गीतों के प्राण सघन,
छूम छनन छन, छूम छनन ।
बजा व्योम वीणा के तार,
भरती हम नीली झंकार,
सिहर-सिहर उठता त्रिभुवन ।
छूम छनन छन, छूम छनन ।
सपनों की सुषमा रंगीन,
कलित कल्पना पर उड्डीन,
हम फिरती हैं भुवन-भुवन
छूम छनन छन, छूम छनन ।
हम अभुक्त आनन्द-हिलोर,
भिंगो भुमि-अम्बर के छोर,
बरसाती फिरती रस-कन ।
छूम छनन छन, छूम छनन ।