Hindi Poetry Suryakant Tripathi Nirala – Unse sansaar bhav vaibhav dwaar September 10, 2022 rhymecloud उनसे-संसार, भव-वैभव-द्वार उनसे-संसार, भव-वैभव-द्वार। समझो वर निर्जर रण; करो बार बार स्मरण, निराकार करण-हरण, शरण, मरणपार। रवि की छवि के प्रभात, ज्योति के अदृश्य गात, गन्ध-मन्द-पवन-जात, उर-उर के हार।