Javed Akhtar – oh zamaana guzar gya kab ka
वो ज़माना गुज़र गया कब का था जो दीवाना मर गया कब का ढ़ूँढता था जो इक नई दुनिया लौटके
Read MorePunjabi, Hindi Poetry and Lyrics
Javed Akhtar (born 17 January 1945) is an Indian political activist, poet, lyricist, and screenwriter, originally from Gwalior area. He is a recipient of the Padma Shri (1999), Padma Bhushan (2007),[1] the Sahitya Akademi Award as well as five National Film Awards. In the early part of his career, he was a screenplay writer, creating movies like Deewar, Janzeer, and Sholay. Later he left screenplay writing and became a lyricist.
वो ज़माना गुज़र गया कब का था जो दीवाना मर गया कब का ढ़ूँढता था जो इक नई दुनिया लौटके
Read Moreअभी ज़मीर में थोड़ी-सी जान बाक़ी है अभी हमारा कोई इम्तेहान बाक़ी है हमारे घर को तो उजड़े हुए ज़माना
Read Moreज़िंदगी की आँधी में ज़हन का शजर तन्हा तुमसे कुछ सहारा था, आज हूँ मगर तन्हा ज़ख़्म-ख़ुर्दा लम्हों को मसलेहत
Read Moreबाप की उँगली थामे इक नन्हा-सा बच्चा पहले-पहल मेले में गया तो अपनी भोली-भाली कंचों जैसी आँखों से इक दुनिया
Read Moreअजीब आदमी था वो मुहब्बतों का गीत था, बग़ावतों का राग था कभी वो सिर्फ़ फूल था कभी वो सिर्फ़
Read Moreबरसों की रस्मो-राह थी इक रोज़ उसने तोड़ दी हुशियार हम भी कम नहीं, उम्मीद हमने छोड़ दी गिरहें पड़ी
Read Moreये आए दिन के हंगामे ये जब देखो सफ़र करना यहाँ जाना – वहाँ जाना इसे मिलना उसे मिलना हमारे
Read Moreनींद के बादलों के पीछे है मुस्कुराता हुआ कोई चेहरा चेहरे पे बिखरी एक रेशमी लट सरसराता हुआ कोई आँचल
Read Moreकिसलिए कीजे बज़्म-आराई पुरसुकूँ हो गई है तन्हाई फिर ख़मोशी ने साज़ छेड़ा है फिर ख़यालात ने ली अंगड़ाई यूँ
Read Moreन ख़ुशी दे तो कुछ दिलासा दे दोस्त, जैसे हो मुझको बहला दे आगही से मिली है तन्हाई आ मिरी
Read Moreयाद उसे भी एक अधूरा अफ़साना तो होगा कल रस्ते में उसने हमको पहचाना तो होगा डर हमको भी लगता
Read More(ये नज़्म अगस्त को हिंदुस्तानी पार्लियामेंट में उसी जगह सुनाई गई थी जहाँ से अगस्त में पंडित जवाहर लाल नेहरू
Read Moreमेरे रस्ते में इक मोड़ था और उस मोड़ पर पेड़ था एक बरगद का ऊँचा घना जिसके साए में
Read Moreप्यास की कैसे लाए ताब कोई नहीं दरिया तो हो सराब कोई ज़ख़्म दिल में जहाँ महकता है इसी क्यारी
Read Moreएक पुराने और घनेरे पेड़ की इक डाली से लिपटी बेल में सारी पेड़ की रंगत पेड़ की ख़ुश्बू समा
Read Moreआज मैंने अपना फिर सौदा किया और फिर मैं दूर से देखा किया ज़िंदगी भर मेरे काम आए उसूल एक-इक
Read Moreहमारे दिल में अब तल्ख़ी नहीं है मगर वो बात पहले-सी नहीं है मुझे मायूस भी करती नहीं है यही
Read Moreख़याल आता है जैसे बच्चों की आँख बादल में शेर और हाथी देखती है बहुत-से लोगों ने वक़्त में भी
Read Moreकुछ तुमने कहा कुछ मैंने कहा और बढ़ते-बढ़ते बात बढ़ी दिल ऊब गया दिन डूब गया और गहरी-काली रात बढ़ी
Read Moreदर्द कुछ दिन तो मेह्माँ ठहरे हम बिज़द हैं कि मेज़बाँ ठहरे सिर्फ़ तन्हाई सिर्फ़ वीरानी ये नज़र जब उठे
Read Moreमैं ख़ुद भी कब ये कहता हूँ कोई सबब नहीं तू सच है मुझको छोड़ भी दे तो अजब नहीं
Read More