Ramdhari Singh Dinkar – Nimantran
निमंत्रण तिमिर में स्वर के बाले दीप, आज फिर आता है कोई। ’हवा में कब तक ठहरी हुई रहेगी जलती
Read MorePunjabi, Hindi Poetry and Lyrics
निमंत्रण तिमिर में स्वर के बाले दीप, आज फिर आता है कोई। ’हवा में कब तक ठहरी हुई रहेगी जलती
Read Moreशेष गान संगिनि, जी भर गा न सका मैं। गायन एक व्याज़ इस मन का, मूल ध्येय दर्शन जीवन का,
Read Moreधीरे-धीरे गा बटोही, धीरे-धीरे गा। बोल रही जो आग उबल तेरे दर्दीले सुर में, कुछ वैसी ही शिखा एक सोई
Read Moreपरदेशी माया के मोहक वन की क्या कहूँ कहानी परदेशी? भय है, सुन कर हँस दोगे मेरी नादानी परदेशी! सृजन-बीच
Read Moreआशा का दीपक वह प्रदीप जो दीख रहा है झिलमिल, दूर नहीं है; थककर बैठ गये क्या भाई! मंजिल दूर
Read Moreशब्द-वेध खेल रहे हिलमिल घाटी में, कौन शिखर का ध्यान करे ? ऐसा बीर कहाँ कि शैलरुह फूलों का मधुपान
Read Moreप्रणति-3 आनेवालो ! तुम्हें प्रणाम । ‘जय हो’, नव होतागण ! आओ, संग नई आहुतियाँ लाओ, जो कुछ बने फेंकते
Read Moreपरिचय सलिल कण हूँ, या पारावार हूँ मैं स्वयं छाया, स्वयं आधार हूँ मैं बँधा हूँ, स्वपन हूँ, लघु वृत
Read Moreप्रणति-2 नमन उन्हें मेरा शत बार । सूख रही है बोटी-बोटी, मिलती नहीं घास की रोटी, गढ़ते हैं इतिहास देश
Read Moreप्रणति-1 कलम, आज उनकी जय बोल जला अस्थियाँ बारी-बारी छिटकाई जिनने चिंगारी, जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर लिए बिना गर्दन
Read Moreप्रेम का सौदा सत्य का जिसके हृदय में प्यार हो, एक पथ, बलि के लिए तैयार हो । फूँक दे
Read Moreकविता की पुकार आज न उडु के नील-कुंज में स्वप्न खोजने जाऊँगी, आज चमेली में न चंद्र-किरणों से चित्र बनाऊँगी।
Read Moreहिमालय मेरे नगपति! मेरे विशाल! साकार, दिव्य, गौरव विराट्, पौरूष के पुन्जीभूत ज्वाल! मेरी जननी के हिम-किरीट! मेरे भारत के
Read More