Hindi Poetry

Faiz Ahmed Faiz – Bhai


भाई

आज से बारह बरस पहले बड़ा भाई मिरा
सतालिनगराद की जंगाह में काम आया था
मेरी मां अब भी लिये फिरती है पहलू में ये ग़म
जब से अब तक है वह तन पे रिदा-ए-मातम
और उस दुख से मेरी आंख का गोशा तर है
अब मेरी उमर बड़े भाई से कुछ बढ़कर है

(रिदा-ए-मातम=शोक की चादर)