Hindi Poetry Faiz Ahmed Faiz – Bhai June 12, 2022 rhymecloud भाई आज से बारह बरस पहले बड़ा भाई मिरा सतालिनगराद की जंगाह में काम आया था मेरी मां अब भी लिये फिरती है पहलू में ये ग़म जब से अब तक है वह तन पे रिदा-ए-मातम और उस दुख से मेरी आंख का गोशा तर है अब मेरी उमर बड़े भाई से कुछ बढ़कर है (रिदा-ए-मातम=शोक की चादर)