Faiz Ahmed Faiz – Vaaps laut aayi hai bahaar
वापस लौट आई है बहार
जाग उठी सरसों की किरनें
वापस लौट आई है बहार
पौधे संवरे, सबज़ा निखरा
धुल गये फूलों के रुख़सार
वापस लौट आई है बहार
सहमे-से अफ़सुरदा चेहरे
उन पर ग़म की गर्द वही
ज़ोरो-सितम वैसे के वैसे
सदियों के दुख-दर्द वही
और वही बरसों के बीमार
वापस लौट आई है बहार
ग़म के तपते सहरायों में
धुंधली-सी राहत की चमक
या बेजां हाथों से हटकर
सिमटे-से आंचल की झलक
दिल की शिकसतों के अम्बार
वापस लौट आई है बहार
(सबज़ा=हरियाली, अफ़सुरदा=
उदास, ज़ोरो-सितम=ज़ुल्म)
उदास, ज़ोरो-सितम=ज़ुल्म)