Gulzar – Saara jahan chup chaap hai
सारा जहाँ चुप चाप है, आहटें नासाज़ हैं
क्यूँ हवा ठहरी हुई है आप क्यूँ नाराज़ हैं
फीके लगते हैं ये मौसम, आप जब हंसते नहीं
दिन गुज़र जाता है लेकिन लम्हें कुछ कटते नहीं
कुछ तो कहिये दिन में क्यूँ ये शाम के अन्दाज़ हैं
सारा जहां चुपचाप है, आहटें नासाज़ हैं।
बोलिए कुछ बोलिए ना ख़ामोशी के लब खुले
दोस्ती के ऐसे मौसम फिर ना जाने कब खुले
रूठ जाना दोस्ती में, दोस्त के अंदाज़ हैं,
सारा जहां चुपचाप है, आहटें नासाज़ हैं।
सारा जहाँ चुप चाप है, आहटें नासाज़ हैं
क्यूँ हवा ठहरी हुई है आप क्यूँ नाराज़ हैं
सारा जहाँ चुप चाप है, आहटें नासाज़ हैं
आहटें नासाज़ हैं, आप क्या नाराज़ हैं