Hindi Poetry

Gulzar – Doob rahe ho aur behte ho


डूब रहे हो और बहते हो
दरिया किनारे क्यूँ रहते हो

याद आते हैं वादे जिनके
तेज हवा में सूखे तिनके
उनकी बातें क्यूँ कहते हो

बात करें तो रुख़सारों में
दो चकराते भंवर पड़ते हैं
मझधारों में क्यूँ रहते हो