Gulzar – Doob rahe ho aur behte ho
डूब रहे हो और बहते हो
दरिया किनारे क्यूँ रहते हो
याद आते हैं वादे जिनके
तेज हवा में सूखे तिनके
उनकी बातें क्यूँ कहते हो
बात करें तो रुख़सारों में
दो चकराते भंवर पड़ते हैं
मझधारों में क्यूँ रहते हो
Punjabi, Hindi Poetry and Lyrics
डूब रहे हो और बहते हो
दरिया किनारे क्यूँ रहते हो
याद आते हैं वादे जिनके
तेज हवा में सूखे तिनके
उनकी बातें क्यूँ कहते हो
बात करें तो रुख़सारों में
दो चकराते भंवर पड़ते हैं
मझधारों में क्यूँ रहते हो