Hindi Poetry

Gulzar – Bimaar yaad


बीमार याद

इक याद बड़ी बीमार थी कल,
कल सारी रात उसके माथे पर,
बर्फ़ से ठंडे चाँद की पट्टी रख रखकर-
इक इक बूँद दिलासा देकर,
अज़हद कोशिश की उसको ज़िन्दा रखने की !
पौ फटने से पहले लेकिन…
आख़िरी हिचकी लेकर वह ख़ामोश हुई !!