Hindi Poetry

Gulzar – Chaad saman


चाँद समन

रोज आता है ये बहरूपिया,
इक रूप बदलकर,
और लुभा लेता है मासूम से लोगों को अदा से !
पूरा हरजाई है, गलियों से गुजरता है,
कभी छत से, बजाता हुआ सिटी—
रोज आता है, जगाता है, बहुत लोगो को शब् भर !
आज की रात उफक से कोई,
चाँद निकले तो गिरफ्तार ही कर लो !!