Hindi Poetry Gulzar – Bimaar yaad December 21, 2020 rhymecloud बीमार याद इक याद बड़ी बीमार थी कल, कल सारी रात उसके माथे पर, बर्फ़ से ठंडे चाँद की पट्टी रख रखकर- इक इक बूँद दिलासा देकर, अज़हद कोशिश की उसको ज़िन्दा रखने की ! पौ फटने से पहले लेकिन… आख़िरी हिचकी लेकर वह ख़ामोश हुई !!