Hindi Poetry Gulzar – Ghalib January 2, 2020 rhymecloud ग़ालिब रात को अक्सर होता है,परवाने आकर, टेबल लैम्प के गिर्द इकट्ठे हो जाते हैं सुनते हैं,सर धुनते हैं सुन के सब अश’आर गज़ल के जब भी मैं दीवान-ए-ग़ालिब खोल के पढ़ने बैठता हूँ सुबह फिर दीवान के रौशन सफ़हों से परवानों की राख उठानी पड़ती है