Hindi Poetry

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Faiz Ahmed Faiz – Shorishe anjeer bismillah

शोरिशे-ज़ंजीर बिस्मिल्लाह हुई फिर इमतहान-ए-इश्क की तदबीर बिसमिल्लाह हर इक तरफ़ मचा कुहराम-ए-दार-ओ-गीर बिसमिल्लाह गली कूचों में बिखरी शोरिश-ए-ज़ंजीर बिसमिल्लाह

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