Ramdhari Singh Dinkar – Yeh gaan bohat roye
ये गान बहुत रोये तुम बसे नहीं इनमें आकर, ये गान बहुत रोये । बिजली बन घन में रोज हँसा
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ये गान बहुत रोये तुम बसे नहीं इनमें आकर, ये गान बहुत रोये । बिजली बन घन में रोज हँसा
Read Moreमुदे नयन, मिले प्राण मुदे नयन, मिले प्राण, हो गया निशावसान। जगते-जग के कलरव सोये, उर के उत्सव मन्द हुए
Read Moreजीने के लिए मरना जीने के लिए मरना ये कैसी सआदत है मरने के लिए जीना ये कैसी हिमाकत है
Read Moreबर्र और बालक सो रहा था बर्र एक कहीं एक फूल पर, चुपचाप आके एक बालक ने छू दिया. बर्र
Read Moreजननी मोह की रजनी जननी मोह की रजनी पार कर गई अवनी। तोरण-तोरण साजे, मंगल-बाजे बाजे, जन-गण-जीवन राजे, महिलाएँ बनीठनीं।
Read Moreज़िन्दां से एक ख़त मेरी जां तुझको बतलाऊं बहुत नाज़ुक येह नुक़्ता है बदल जात है इंसां जब मकां उसका
Read Moreवीरा के नाम उसने कहा, आओ उसने कहा, ठहरो मुस्कायो, कहा उसने मर जायो, कहा उसने मैं आया मैं ठहर
Read Moreसाथी उसे भी देख, जो भीतर भरा अंगार है साथी। (1) सियाही देखता है, देखता है तू अन्धेरे को, किरण
Read Moreपथ पर बेमौत न मर पथ पर बेमौत न मर, श्रम कर तू विश्रम-कर। उठा उठा करद हाथ, दे दे
Read Moreकनक कसौटी पर कढ़ आया कनक कसौटी पर कढ़ आया स्वच्छ सलिल पर कर की छाया। मान गये जैसे सुनकर
Read Moreप्रीति प्रीति न अरुण साँझ के घन सखि! पल-भर चमक बिखर जाते जो मना कनक-गोधूलि-लगन सखि! प्रीति न अरुण साँझ
Read Moreप्रभाती रे प्रवासी, जाग , तेरे देश का संवाद आया। भेदमय संदेश सुन पुलकित खगों ने चंचु खोली; प्रेम से
Read Moreहुए पार द्वार-द्वार हुए पार द्वार-द्वार, कहीं मिला नहीं तार। विश्व के समाराधन हंसे देखकर उस क्षण, चेतन जनगण अचेत
Read Moreवा मेरे वतन ओ मेरे वतन, ओ मेरे वतन, ओ मेरे वतन मेरे सर पर वो टोपी न रही जो
Read Moreसहरा की रात कहीं भी शबनम कहीं नहीं है अजब कि शबनम कहीं नहीं है न सर्द ख़ुर्शीद की जबीं
Read Moreहरिण-नयन हरि ने छीने हैं हरिण-नयन हरि ने छीने हैं। पावन रँग रग-रग भीने हैं। जिते न-चहती माया महती, बनी
Read Moreजागरण (वसन्त के प्रति शिशिर की उक्ति) मैं शिशिर-शीर्णा चली, अब जाग ओ मधुमासवाली ! खोल दृग, मधु नींद तज,
Read Moreआपकी याद आती रही रात-भर” मख़दूम की याद में-1 “आपकी याद आती रही रात-भर” चाँदनी दिल दुखाती रही रात-भर गाह
Read Moreसाध पुरी, फिरी धुरी साध पुरी, फिरी धुरी। छुटी गैल-छैल-छुरी। अपने वश हैं सपने, सुकर बने जो न बने, सीधे
Read Moreकिसको नमन करूँ मैं ? तुझको या तेरे नदीश, गिरि, वन को नमन करूँ, मैं ? मेरे प्यारे देश !
Read Moreअब के बरस दस्तूरे-सितम में अबके बरस दस्तूरे-सितम में क्या-क्या बाब ईज़ाद हुए जो कातिल थे मकतूल बने, जो सैद
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