Ramdhari Singh Dinkar – Nayi awaaz
नई आवाज कभी की जा चुकीं नीचे यहाँ की वेदनाएँ, नए स्वर के लिए तू क्या गगन को छानता है?
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नई आवाज कभी की जा चुकीं नीचे यहाँ की वेदनाएँ, नए स्वर के लिए तू क्या गगन को छानता है?
Read Moreहारे को हरिनाम सब शोकों का एक नाम है क्षमा ह्रदय, आकुल मत होना। [१] दहक उठे जो अंगारे बन
Read Moreजवानी का झण्डा घटा फाड़ कर जगमगाता हुआ आ गया देख, ज्वाला का बान; खड़ा हो, जवानी का झंडा उड़ा,
Read Moreसूखे विटप की सारिके ! (1) सूखे विटप की सारिके ! उजड़ी-कटीली डार से मैं देखता किस प्यार से पहना
Read Moreआश्वासन तृषित! धर धीर मरु में। कि जलती भूमि के उर में कहीं प्रच्छन्न जल हो। न रो यदि आज
Read Moreगीत-अगीत गीत, अगीत, कौन सुंदर है? गाकर गीत विरह की तटिनी वेगवती बहती जाती है, दिल हलका कर लेने को
Read Moreसावन में जेठ नहीं, यह जलन हृदय की, उठकर जरा देख तो ले; जगती में सावन आया है, मायाविन! सपने
Read Moreभ्रमरी पी मेरी भ्रमरी, वसन्त में अन्तर मधु जी-भर पी ले; कुछ तो कवि की व्यथा सफल हो, जलूँ निरन्तर,
Read Moreअब वही हर्फ़े-जुनूं सबकी ज़बां ठहरी है अब वही हर्फ़े-जुनूं सबकी ज़बां ठहरी है जो भी चल निकली है, वो
Read Moreदिल में अब, यूँ तिरे भूले हुए ग़म आते हैं दिल में अब, यूँ तिरे भूले हुए ग़म आते हैं
Read Moreनज़्रे-सौदा फ़िक्रे-दिलदारी-ए-गुलज़ार करूँ या न करूँ फ़िक्रे-दिलदारी-ए-गुलज़ार करूं या न करूं ज़िक्रे-मुर्गाने-गिरफ़्तार करूं या न करूं क़िस्सा-ए-साज़िशे-अग़यार कहूं या न
Read Moreनज़्रे ग़ालिब किसी गुमाँ पे तवक्क़ो ज़ुयादः रखते हैं किसी गुमाँ पे तवक़्क़ो ज़ियादा रखते हैं फिर आज कू-ए-बुताँ का
Read Moreग़म-ब-दिल, शुक्र-ब-लब, मस्तो-ग़ज़लख़्वाँ चलिए ग़म-ब-दिल, शुक्र-ब-लब, मस्तो-ग़ज़लख़्वाँ चलिए जब तलक साथ तेरे उम्रे-गुरेज़ां चलिए रहमते-हक से जो इस सम्त कभी
Read Moreहैराँ हैं जबीं आज किधर सज्दा रवाँ है हैरां है जबीं आज किधर सजदा रवां है सर पर हैं खुदावन्द,
Read Moreहमीं से अपनी नवा हमकलाम होती रही हमीं से अपनी नवा हमकलाम होती रही ये तेग़ अपने लहू में नियाम
Read Moreहमने सब शे’र में सँवारे थे हमने सब शे’र में सँवारे थे हमसे जितने सुख़न तुम्हारे थे रंगों ख़ुश्बू के,
Read Moreहसरते दीद में गुज़राँ है ज़माने कब से हसरते दीद में गुज़राँ है ज़माने कब से दशते-उमीद में गरदां हैं
Read Moreदाह की कोयल दाह के आकाश में पर खोल, कौन तुम बोली पिकी के बोल? दर्द में भीगी हुई-सी तान,
Read Moreगीत-अगीत गीत, अगीत, कौन सुंदर है? गाकर गीत विरह की तटिनी वेगवती बहती जाती है, दिल हलका कर लेने को
Read Moreगोपाल का चुम्बन छिः, छिः, लज्जा-शरम नाम को भी न गई रह हाय, औचक चूम लिया मुख जब मैं दूह
Read Moreविपक्षिणी (एक रमणी के प्रति जो बहस करना छोड़कर चुप हो रही) क्षमा करो मोहिनी विपक्षिणी! अब यह शत्रु तुम्हारा
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