Hindi Poetry

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Faiz Ahmed Faiz – Sitam

सितम सिखलाएगा रस्मे-वफ़ा ऐसे नहीं होता सितम सिखलाएगा रस्मे-वफ़ा ऐसे नहीं होता सनम दिखलाएँगे राहे-ख़ुदा ऐसे नहीं होता गिनो सब

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