Faiz Ahmed Faiz – Lauho kalam
लौहो-क़लम हम परवरिशे-लौहो-क़लम करते रहेंगे जो दिल पे गुज़रती है रक़म करते रहेंगे असबाबे-ग़मे-इश्क बहम करते रहेंगे वीरानी-ए-दौराँ पे करम
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लौहो-क़लम हम परवरिशे-लौहो-क़लम करते रहेंगे जो दिल पे गुज़रती है रक़म करते रहेंगे असबाबे-ग़मे-इश्क बहम करते रहेंगे वीरानी-ए-दौराँ पे करम
Read Moreसुब्हे-आज़ादी (अगसत, ‘४७) यह दाग़-दाग़ उजाला, यह शब गज़ीदा सहर वो इंतज़ार था जिसका यह वो सहर तो नहीं यह
Read Moreझील मत छुओ इस झील को। कंकड़ी मारो नहीं, पत्तियाँ डारो नहीं, फूल मत बोरो। और कागज की तरी इसमें
Read Moreचांद का कुर्ता हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला, ‘‘सिलवा दो माँ मुझे ऊन का मोटा
Read Moreमिर्च का मज़ा एक काबुली वाले की कहते हैं लोग कहानी, लाल मिर्च को देख गया भर उसके मुँह में
Read Moreसूरज का ब्याह उड़ी एक अफवाह, सूर्य की शादी होने वाली है, वर के विमल मौर में मोती उषा पिराने
Read Moreनिराकार ईश्वर हर चीज, जो खूबसूरत है, किसी-न-किसी देह में है; सुन्दरता शरीर पाकर हँसती है, और जान हमेशा लहू
Read Moreईश्वर की देह ईश्वर वह प्रेरणा है, जिसे अब तक शरीर नहीं मिल है। टहनी के भीतर अकुल्राता हुआ फूल,
Read Moreबर्र और बालक सो रहा था बर्र एक कहीं एक फूल पर, चुपचाप आके एक बालक ने छू दिया बर्र
Read Moreकाढ़ लो दोनों नयन मेरे काढ़ लो दोनों नयन मेरे, तुम्हारी और अपलक देखना तब भी न छोड़ूँगा । तुम्हारे
Read Moreतुम सड़क पर जा रहे थे तुम सड़क पर जा रहे थे, मैं बगल की वीथि पर; तुम बहुत थे
Read Moreकवि और प्रेमी प्राप्त है इनको सखे! कुछ ज्ञान भी, अज्ञान भी। वायु हैं ये, विश्व के मन को बहा
Read Moreनाम तुम कहाँ से आ रहे हो? नाम क्या है? वह पुकारु शब्द मत मुझको बताओ, जो तुम्हारा आवरण है
Read Moreपढ़क्कू की सूझ एक पढ़क्कू बड़े तेज थे, तर्कशास्त्र पढ़ते थे, जहाँ न कोई बात, वहाँ भी नए बात गढ़ते
Read Moreसमुद्र का पानी बहुत दूर पर अट्टहास कर सागर हँसता है। दशन फेन के, अधर व्योम के। ऐसे में सुन्दरी!
Read Moreवातायन मैं झरोखा हूँ कि जिसकी टेक लेकर विश्व की हर चीज बाहर झाँकती है। पर, नहीं मुझ पर, झुका
Read Moreतराना-१ हम मेहनतकश जगवालों से जब अपना हिस्सा मांगेंगे इक खेत नहीं इक देश नहीं हम सारी दुनिया मांगेंगे यां
Read Moreदुआ आईए, हाथ उठायें हम भी हम जिन्हें रसमे-दुआ याद नहीं हम जिन्हें सोज़े-मोहब्बत के सिवा कोई बुत कोई ख़ुदा
Read Moreसोचने दो (आंदरे वोजनेसेंसकी के नाम) इक ज़रा सोचने दो इस ख़्याबां में जो इस लहज़ा बियाबां भी नहीं कौन-सी
Read Moreऐ वतन, ऐ वतन तेरे पैग़ाम पर, तेरे पैग़ाम पर, ऐ वतन, ऐ वतन आ गये हम फ़िदा हो तिरे
Read Moreब्लैक आऊट जब से बे-नूर हुई हैं शमएं ख़ाक में ढूंढता फिरता हूं न जाने किस जा खो गई हैं
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