Faiz Ahmed Faiz – Nisaar mai teri galiyon ke ae vatan
निसार मैं तेरी गलियों के ऐ वतन निसार मैं तेरी गलियों के ऐ वतन, कि जहां चली है रसम कि
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निसार मैं तेरी गलियों के ऐ वतन निसार मैं तेरी गलियों के ऐ वतन, कि जहां चली है रसम कि
Read Moreशीशों का मसीहा कोई नहीं मोती हो कि शीशा, जाम कि दुर जो टूट गया, सो टूट गया कब अश्कों
Read Moreयाद दशते-तनहायी में, ऐ जाने-जहां, लरज़ां हैं तेरी आवाज़ के साये, तिरे होठों के सराब दशते-तनहायी में, दूरी के ख़सो-ख़ाक
Read Moreज़िन्दां की एक सुबह रात बाकी थी अभी जब सरे-बालीं आकर चांद ने मुझसे कहा, “जाग, सहर आई है !
Read Moreज़िन्दाँ की एक शाम शाम के पेच-ओ-ख़म सितारों से ज़ीना-ज़ीना उतर रही है रात यूँ सबा पास से गुज़रती है
Read Moreसूर्य सूर्य, तुम्हें देखते-देखते मैं वृद्ध हो गया । लोग कहते हैं, मैंने तुम्हारी किरणें पी हैं, तुम्हारी आग को
Read Moreकविता और आत्मज्ञान कविता क्या है ? महर्षि रमण ने कहा । मानसिक शक्तियों का मन्थन कर कीर्ति उत्पन्न करना,
Read Moreखोज खोजियो, तुम नहीं मानोगे, लेकिन संतों का कहना सही है । जिस घर में हम घूम रहे हैं, उससे
Read Moreबिसाते-रक़्स पे साद शर्क़ो-गरब से सरे शाम बिसाते-रक़्स पे साद शर्क़ो-गरब से सरे शाम दमक रहा है तेरी दोस्ती का
Read Moreबात बस से निकल चली है बात बस से निकल चली है दिल की हालत सँभल चली है जब जुनूँ
Read Moreपरंपरा परंपरा को अंधी लाठी से मत पीटो उसमें बहुत कुछ है जो जीवित है जीवन दायक है जैसे भी
Read Moreकुंजी घेरे था मुझे तुम्हारी साँसों का पवन, जब मैं बालक अबोध अनजान था। यह पवन तुम्हारी साँस का सौरभ
Read Moreमेरे दर्द को जो ज़बाँ मिले मेरा दर्द नग़मा-ए-बे-सदा मेरी ज़ात ज़र्रा-ए-बे-निशाँ मेरे दर्द को जो ज़बाँ मिले मुझे अपना
Read Moreपाँवों से लहू को धो डालो हम क्या करते किस रह चलते हर राह में कांटे बिखरे थे उन रिश्तों
Read Moreऐ शाम मेहरबां हो ऐ शाम मेहरबां हो ऐ शाम-ए-शहर-ए-यारां हम पे मेहरबां हो दोज़ख़ी दोपहर सितम की बेसबब सितम
Read Moreसज्जाद ज़हीर के नाम न अब हम साथ सैरे-गुल करेंगे न अब मिलकर सरे-मकत्ल चलेंगे हदीसे-दिलबरां बाहम करेंगे न ख़ूने-दिल
Read Moreगीत चलो फिर से मुस्कुराएं चलो फिर से दिल जलाएं जो गुज़र गई हैं रातें उनहें फिर जगा के लाएं
Read Moreहम तो मज़बूर थे इस दिल से हम तो मज़बूर थे इस दिल से कि जिसमें हर दम गरदिशे-ख़ूं से
Read Moreढाका से वापसी पर हम केः ठहरे अजनबी इतनी मदारातों के बाद फिर बनेंगे आशना कितनी मुलाक़ातों के बाद कब
Read Moreबहार आई बहार आई तो जैसे एक बार लौट आये हैं फिर अदम से वो ख़्वाब सारे, शबाब सारे जो
Read Moreतुम अपनी करनी कर गुज़रो अब कयूं उस दिन का ज़िकर करो जब दिल टुकड़े हो जायेगा और सारे ग़म
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