Hindi Poetry

Faiz Ahmed Faiz – Ijje ahle-sitam ki baat kro


इज्ज़े अहले-सितम की बात करो

इज्ज़े अहले-सितम की बात करो
इश्क़ के दम-क़दम की बात करो
बज़्मे-अहले-तरब से शरमाओ
बज़्मे-असहाबे-ग़म की बात करो

बज़्मे-सरवत के खुशनसीबों से
अज़्मते-चश्मे-नम की बात करो

है वही बात यूं भी और यूं भी
तुम सितम या करम की बात करो

ख़ैर, हैं अहले-दैर जैसे हैं
आप अहले-हरम की बात करो

हिज़्र की शब तो कट ही जायेगी
रोज़े-वस्ले-सनम की बात करो

जान जायेंगे जानने वाले
फ़ैज़ फ़रहादो-जम की बात करो

(इज़्ज़े-अहले-सितम=ज़ुल्म करने
वालों की बेबसी, अहले-तरब=सुखी
बज़्मे-असहाबे-ग़म=दुखी लोगों की
दुनिया, सरवत=खुशहाली, अज़मते-
चश्मे-नम=नम आँखों की महानता,
जम=बादशाह जमशेद)