Hindi Poetry

Faiz Ahmed Faiz – Ik geet dard ke naam


एक गीत दर्द के नाम

ऐ हमारी सारी रातों को
दर्द देने वाले
और दिल जलाने वाले
ऐ हमारी अंखड़ियों को
बेख़्वाबियों के साग़र
सरे-शब पिलाने वाले
किसी रहगुज़र पे इक दिन
भीगी हुई सहर में
तू हमें कहीं मिला था
और हमने तरस खाकर
इक जाम मुलतफ़ित का
अपने दिलो-जिगर का
इक मुज़तरब-सा गोशा
तेरी नज़र कर दिया था
वो दिन और आज का दिन
इक पल को साथ अपना
तूने कभी न छोड़ा
दुनिया की वुसअतों में
गलियों में रास्तों में
तू साथ ही हमारे
जिस उदास सुबह इक दिन
तू हमें कहीं मिला था
ऐ काश हमने तुझ को
कुछ भी दिया न होता
ऐ दिल जलाने वाले
बेख़्वाबियों के साग़र
हम को पिलाने वाले

(मुलतफ़ित=खींच, मुज़तरब=
बेचैन, वुसअतों=बिखराव)