Hindi Poetry

Faiz Ahmed Faiz – Marde-daana


मर्दे-दाना

मर्दे-दाना पी के अहमक से कभी बदतर हुआ
और कभी बरअक़्स इसके हुआ, अक़्सर हुआ

(मर्दे-दाना=बुद्धिमान आदमी, बरअक्स=उलट)