Hindi Poetry

Gulzar – Aisa koi zindagi se vaada toh nahi tha


ऐसा कोई ज़िन्दगी से वादा तो नहीं था
तेरे बिना जीने का इरादा तो नहीं था
तेरे लिए रातों में चांदनी उगाई थी
क्यारियों में खुशबु की रौशनी लगाई थी
जाने कहाँ टूटी है डोर मेरे ख़्वाब की
ख़्वाब से जागेंगे सोचा तो नहीं था

शामियाने शामों के रोज ही सजाये थे
कितनी उम्मीदों के मेहमां बुलाये थे
आ के दरवाज़े से लौट गए हो
यूँ भी कोई आएगा सोचा तो नहीं था