Hindi Poetry

Gulzar – Bndobast hai, zabardust hai


बंदोबस्त है जबर्दस्त है
खून की खुश्बू बड़ी मस्त है
हमारा हुक्मरां बड़ा अरे कम्बखत है
बंदोबस्त है जबर्दस्त

समय बड़ा घर कर देता है
समय के हाथ में आरी है
वक़्त से पंजा मत लेना
वक़्त का पंजा भारी है

सिंग हवा के न पकड़ो
आंधी है ये न पकड़ो
जड़ो के ताके कट जायेंगे
मर कुल्हाड़ी न पकड़ो

काल की अरे काल की
लाठी बड़ी ही सख्त है
बंदोबस्त है जबर्दस्त
हमारा हुक्मरां कम्बखत है

जो मट्टी में उगते हैं
उनको दफना के क्या होगा
जो नंगे तन जीते हैं
उनको कफना के क्या होगा

दफन करो न मट्टी में
चढ़े हैं अपनी भक्ति में
मट्टी में दिल बोये में
हम उगते है मट्टी में

कोक की अरे कोक की
मुट्ठी बड़ी ही सख्त है
बंदोबस्त है जबर्दस्त है
बंदोबस्त है जबर्दस्त है
खून की खुश्बू बड़ी मस्त है
हमारा हुक्मरां बड़ा अरे कम्बखत है