Hindi Poetry Gulzar – Dange December 1, 2020 rhymecloud दंगे शहर में आदमी कोई भी नहीं क़त्ल हुआ नाम थे लोगों के जो क़त्ल हुए सर नहीं कटा किसी ने भी कहीं पर कोई लोगों ने टोपियाँ काटी थीं, कि जिनमें सर थे और ये बहता हुआ, लहू है जो सड़क पर सिर्फ आवाजें-ज़बा करते हुए खून गिरा था