Hindi Poetry Gulzar – Uljhan January 2, 2020 rhymecloud उलझन एक पशेमानी रहती है उलझन और गिरानी भी.. आओ फिर से लड़कर देंखें शायद इससे बेहतर कोई और सबब मिल जाए हमको फिर से अलग हो जाने का!!