Hindi Poetry

Javed Akhtar – Sookhi tehni tanhi chidiya feeka chaand


सूखी टहनी तन्हा चिड़िया फीका चाँद
आँखों के सहरा में एक नमी का चाँद

उस माथे को चूमे कितने दिन बीते
जिस माथे की ख़ातिर था इक टीका चाँद

पहले तू लगती थी कितनी बेगाना
कितना मुबहम होता है पहली का चाँद

कम हो कैसे इन ख़ुशियों से तेरा ग़म
लहरों में कब बहता है नद्दी का चाँद

आओ अब हम इस के भी टुकड़े कर लें
ढाका रावलपिंडी और दिल्ली का चाँद