Hindi Poetry Ramdhari Singh Dinkar – Vaatayan September 24, 2022 rhymecloud वातायन निज वातायन से तुम्हें देखता मैं बेसुध, जब-जब तुम रेलिंग पकड़ खड़ी हो जाती हो, चाँदनी तुम्हारी खिड़की पर थिरकी फिरती, तुम किसी और के सपने में मँडराती हो।