Hindi Poetry Suryakant Tripathi Nirala – Anmil anmil milte September 24, 2022 rhymecloud अनमिल-अनमिल मिलते अनमिल-अनमिल मिलते प्राण, गीत तो खिलते। उड़ती हैं छुट-छुटकर आँखें मन के नभ पर और किसी मणि के घर झिलमिल सुख से हिलते। किससे मैं कहूँ व्यथा– अपनी जित-विजित कथा? होगी भी अनन्यता छन की लौ के झिलते?