Hindi Poetry

Suryakant Tripathi Nirala – Anmil anmil milte


अनमिल-अनमिल मिलते

अनमिल-अनमिल मिलते
प्राण, गीत तो खिलते।

उड़ती हैं छुट-छुटकर
आँखें मन के नभ पर
और किसी मणि के घर
झिलमिल सुख से हिलते।

किससे मैं कहूँ व्यथा–
अपनी जित-विजित कथा?
होगी भी अनन्यता
छन की लौ के झिलते?