Hindi Poetry

Suryakant Tripathi Nirala – Aankh bachaate ho toh kya aate ho


आंख बचाते हो तो क्या आते हो

आँख बचाते हो
तो क्या आते हो?

काम हमारा बिगड़ गया
देखा रूप जब कभी नया;
कहाँ तुम्हारी महा दया?
क्या क्या समझाते हो?–
आँख बचाते हो।

लीक छोड़कर कहाँ चलूं?
दाने के बिना क्या तलूं?
फूला जब नहीं क्या फलूं?
क्या हाथ बटाते हो?–
आँख बचाते हो।