Hindi Poetry

Suryakant Tripathi Nirala – Chalin nishi mein tum aayi praat


चलीं निशि में तुम आई प्रात

चलीं निशि में तुम आई प्रात;
नवल वीक्षण, नवकर सम्पात,

नूपुर के निक्वण कूजे खग,
हिले हीरकाभरण, पुष्प मग,
साँस समीरण, पुलकाकुल जग,
हिले पग जलजात।