Hindi Poetry Suryakant Tripathi Nirala – Tapan se ghan, man shayan ne May 26, 2021 rhymecloud तपन से घन, मन शयन से तपन से घन, मन शयन से, प्रातजीवन निशि-नयन से। प्रमद आलस से मिला है, किरण से जलरुह किला है, रूप शंका से सुघरतर अदर्शित होकर खिला है, गन्ध जैसे पवन से, शशि रविकरों से, जन अयन से।