Hindi Poetry Suryakant Tripathi Nirala – Tapi aatap se jo sit gaat September 9, 2022 rhymecloud तपी आतप से जो सित गात तपी आतप से जो सित गात, गगन गरजे घन, विद्युत पात। पलटकर अपना पहला ओर, बही पूर्वा छू छू कर छोर; हुए शीकर से निश्शर कोर, स्निग्ध शशि जैसे मुख अवदात।