Hindi Poetry Suryakant Tripathi Nirala – Vedna bni meri avni August 5, 2025 rhymecloud वेदना बनी मेरी अवनी वेदना बनी; मेरी अवनी। कठिन-कठिन हुए मृदुल पद-कमल विपद संकल भूमि हुई शयन-तुमुल कण्टकों घनी। तुमने जो गही बांह, वारिद की हुई छांह, नारी से हुईं नाह, सुकृत जीवनी। पार करो यह सागर दीन के लिए दुस्तर, करुणामयि, गहकर कर, ज्योतिर्धमनी।