Suryakant Tripathi Nirala – Kaam ke shavi dhaam
काम के छवि-धाम काम के छवि-धाम, शमन प्रशमन राम! सिन्धुरा के सीस सिन्दूर, जगदीश, मानव सहित-कीश, सीता-सती-नाम। अरि-दल-दलन-कारि, शंकर, समनुसारि
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काम के छवि-धाम काम के छवि-धाम, शमन प्रशमन राम! सिन्धुरा के सीस सिन्दूर, जगदीश, मानव सहित-कीश, सीता-सती-नाम। अरि-दल-दलन-कारि, शंकर, समनुसारि
Read Moreहे जननि, तुम तपश्चरिता हे जननि, तुम तपश्चरिता, जगत की गति, सुमति भरिता। कामना के हाथ थक कर रह गये
Read Moreमुक्तादल जल बरसो, बादल मुक्तादल जल बरसो, बादल, सरिसर कलकलसरसो बादल! शिखि के विशिख चपल नर्तन वन, भरे कुंजद्रुम षटपद
Read Moreगगन गगन है गान तुम्हारा गगन गगन है गान तुम्हारा, घन घन जीवनयान तुम्हारा। नयन नयन खोले हैं यौवन, यौवन
Read Moreबीन वारण के वरण घन बीन वारण के वरण घन, जो बजी वर्षित तुम्हारी, तार तनु की नाचती उतरी, परी,
Read Moreतपन से घन, मन शयन से तपन से घन, मन शयन से, प्रातजीवन निशि-नयन से। प्रमद आलस से मिला है,
Read Moreमाँ अपने आलोक निखारो माँ अपने आलोक निखारो, नर को नरक-त्रास से वारो। विपुल दिशावधि शून्य वगर्जन, व्याधि-शयन जर्जर मानव
Read Moreतुम्हारी छांह है, छल है तुम्हारी छांह है, छल है, तुम्हारे बाल हैं, बल है। दृगों में ज्योति है, शय
Read Moreकिरणों की परियां मुसका दीं किरणों की परियाँ मुसका दीं। ज्योति हरी छाया पर छा दी। परिचय के उर गूंजे
Read Moreघन आये घनश्याम न आये घन आये घनश्याम न आये। जल बरसे आँसू दृग छाये। पड़े हिंडोले, धड़का आया, बढ़ी
Read Moreतुलसीदास (1) भारत के नभ के प्रभापूर्य शीतलाच्छाय सांस्कृतिक सूर्य अस्तमित आज रे-तमस्तूर्य दिङ्मण्डल; उर के आसन पर शिरस्त्राण शासन
Read Moreचुम्बन लहर रही शशिकिरण चूम निर्मल यमुनाजल, चूम सरित की सलिल राशि खिल रहे कुमुद दल कुमुदों के स्मिति-मन्द खुले
Read Moreसच है यह सच है:- तुमने जो दिया दान दान वह, हिन्दी के हित का अभिमान वह, जनता का जन-ताका
Read Moreगीत जैसे हम हैं वैसे ही रहें, लिये हाथ एक दूसरे का अतिशय सुख के सागर में बहें। मुदें पलक,
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