Hindi Poetry

Amir Khusro – Ban ke panchi bay baavre


बन के पंछी भए बावरे, ऐसी बीन बजाई सांवरे।
तार तार की तान निराली, झूम रही सब वन की डाली। (डारी)
पनघट की पनिहारी ठाढ़ी, भूल गई खुसरो पनिया भरन को।